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Sunday, October 25, 2015

पानी पानी

पेड़ लगे
बंग्लादेश में
बादल आया
हिन्दुस्तान में।

बारिश हुई
चेरापूंजी में
चाय उगी
बागान में।

चाय पी
राम ने
चाय पी
रहिम ने।

पानी खिचा
माटी ने
पानी मिला
पानी से।

रोक लगाया
तामिल ने
रोक लगाया
कर्नाटक ने।

आग  लगी
भाषाओं में
मारे गये
दंगों  मे।

हल्ला हुआ
संसद में
हल्ला हुआ
चौराहों पे।

वोट बने
नेताओं के
नाक कटी
देश की।


Monday, October 19, 2015

हाल अपना ठीक है



हाल अपना ठीक है -

हाल अपना ठीक है 
पोखरण पे मतभेद है 
देहरी मैं मनभेद है 
महँगाई का खेद है 
हाल अपना ठीक है 
हरी बोल बोल हरी 

नमक बिना दाल है 
माछ बिना बंगाल है 
प्याज बिना तरकारी है 
नाही कुछ दरकारी है 
हाल अपना ठीक है 
हरी बोल बोल हरी 

बिना चरित मिनिस्टर है 
बिना गणित एस्ट्रोलोजर है
बिना टाई ऑफिसर है 
बिना वेतन टीचर है 
हाल अपना ठीक है 
हरी बोल बोल हरी 

बिना पूछे कवि है 
बिना पूजे रवि है 
छाया ही छवि है 
छवि ही विप्लवी है 
हाल अपना ठीक है 
हरी बोल बोल हरी 

मन में तो डर है 
तन किन्तु निडर है 
अपना ही देश है 
अपने ही लोग है 
हाल अपना ठीक है 
हरी बोल बोल हरी 

कानो में रुई है 
ज़ुबान पे सुई है 
आँखों पे पट्टी है  
धोखे की टट्टी है  
हाल अपना ठीक है 
हरी बोल बोल हरी 

अयोधा की हिस्ट्री है
रामसेतू बनी मिस्ट्री है 
कैसे हुई सृष्टि है 
किसकी कुदृष्टि है 
हाल अपना ठीक है 
हरी बोल बोल हरी 

Sunday, October 18, 2015

मौत आती मेरे पीछे



मौत आती  मेरे पीछे 


मौत आती  मेरे पीछे
ज़िन्दगी मेरे पीछे पीछे।।

अगर कहीं मैं जी गया
कहीँ बुढ़ापा देख लिया
नाना बनकर कहानियाँ सुनाई
बचपन कहीँ मेरा लौट आया।
मौत आती मेरे पीछे
ज़िन्दगी मेरे पीछे पीछे।।

आतंकवादी  मेरे पीछे
गोले हथगोले मेरे पीछे
कट्टरपंथी मेरे पीछे
कट्टा- पत्थर मेरे पीछे।
मौत आती मेरे पीछे
ज़िन्दगी मेरे पीछे पीछे।।

नन्हे - बूढ़े चले संग संग
बारूदी सुरंग करे रंग भंग
मैं बेचारा जग का प्यारा
फूलो से भी डरा डरा
अपनों से ही अब टक्कर
कैसा है ये अब चक्कर।
मौत आती मेरे पीछे
ज़िन्दगी मेरे पीछे पीछे।।

काश कहीँ मैं जी गया
हरी का नाम कुछ जप लिया
क्या कुछ जाने मैंने खोया
मरकर जी कर न पाया
ईश्वर अल्लाह की साया
शीतल तरुवर मनोरम छाया।
मौत आती मेरे पीछे
ज़िन्दगी मेरे पीछे पीछे।।